परिचय

👉 मेरा जन्म 13 जुलाई 1976 को आगरा जनपद उत्तरप्रदेश में हुआ। आरम्भिक स्कूली शिक्षा गृह जनपद में ही हुई। 19 वर्ष की आयु में मैं संस्कृत अध्ययन के हेतु “पाणिनि-महाविद्यालय” , रेवली, सोनीपत, हरियाणा, में प्रविष्ट हुआ। यहाँ गुरुकुल में प्राचीन संस्कृत शिक्षा, व्याकरण, निरुक्त, दर्शन, कल्प, वेद आदि का 12 वर्ष तक निरन्तर स्व. श्रद्धेय पूज्य आचार्य विजयपाल विद्यावारिधि जी से गहन अध्ययन किया। तत्पश्चात् पूर्वमीमांसा दर्शन का अध्ययन पूज्य गुरु वासुदेव पराञ्जपे जी से 2 वर्ष मैसूर, कर्नाटक में रहकर किया। वर्तमान में संस्कृत भाषा के महान् पण्डित पूज्य श्रद्धेय गुरुवर आचार्य प्रद्युम्न जी महाराज के सान्निध्य  पतञ्जलियोगपीठ हरिद्वार में सेवारत हूँ तथा संस्कृत भाषा का अध्यापन तथा लेखन कार्य कर रहा हूँ। इसके अतिरिक्त  यूट्यूब आदि सोशल नेटवर्क के द्वारा भी ऑनलाइन क्लासेस् से देश-विदेश के अध्येताओं को अध्यापन का कार्य जारी है। वर्तमान समय मैं सपरिवार हरिद्वार (उतराखण्ड), भारत में निवास करता हूँ। मेरे जीवन का मुख्य लक्ष्य है संस्कृत भाषा का प्रचार-प्रसार करना और अधिक से अधिक लोग संस्कृत भाषा सीखकर परस्पर सम्भाषण करें, ऐसी कामना है।

👉पठन्तु संस्कृतं वदन्तु संस्कृतं रक्षन्तु च संस्कृतम्। वसुधैव कुटुम्बकम् इत्यस्माकमुद्घोषः। ।

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देववाणी संस्कृतम्, E–गुरुकुलम्, हरिद्वारनगरम्, भारतम् (आर्यावर्तः)

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